Saturday, May 06, 2006

बच्चों कि लिए- इकबाल

Dedicated to my my niece Avni :)


लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शम्मअ़ की सूरत हो खुदाया मेरी

दूर दुनिया का मेरे दम से अंधेरा हो जाये
हर जगह मेरे चमकने से उजाला हो जाए

हो मेरे दम से युंही मेरे वतन की ज़ीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत यारब
इल्म की शम्मअ़ से हो मुझको मोहब्बत

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्द-मन्दों से, ज़ईफों से मोहब्बत करना


मेरे अल्लाह! बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राहा है उस पर चलाना मुझको

4 comments:

Sanjukta said...

Hi there.. buzz me when you are in town... who said we can't have impromptu meets.. :-)

AakASH!!! said...

Hindi mein post! Good hai yaar.
And Iqbal, long time since i read nay of his works.
Your niece's birthday or sth?

Unknown said...

Sanjukta: Sure will do ma'm :)

Aakash: Nahi I was just missing her :)

Anonymous said...

Whos avni?
which niece of ours?

chikki